भोपाल | मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने प्रदेश के पौने दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं देने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने बिजली कंपनियों में बड़े पैमाने पर अधिकारी और कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया है। यह भर्तियां साल 2025 में स्वीकृत किए गए करीब 50 हजार नए पदों पर चरणबद्ध तरीके से की जाएंगी। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) के नए चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया भी विधिवत रूप से शुरू कर दी गई है, जिससे जुलाई के अंत तक आयोग को नया मुखिया मिलना तय माना जा रहा है।
35 हजार पदों पर सीधी भर्ती, 15 हजार पदोन्नति से भरे जाएंगे
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस मेगा भर्ती अभियान की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि सरकार ने तीनों बिजली वितरण कंपनियों (पूर्व, पश्चिम, मध्य क्षेत्र) सहित पावर मैनेजमेंट और पावर जनरेटिंग कंपनियों में कुल 50 हजार नए पदों को मंजूरी दी है।
रोजगार का बड़ा अवसर:
"इन स्वीकृत पदों में से 35 हजार पदों को 'सीधी भर्ती' (Direct Recruitment) के जरिए पारदर्शी तरीके से भरा जाएगा, जिससे प्रदेश के तकनीकी युवाओं को बड़ा मौका मिलेगा। वहीं, शेष 15 हजार पदों को विभागीय पदोन्नति (Promotion) के माध्यम से शीघ्र ही भरा जाएगा। कंपनियों ने बीते एक साल में भी 2 हजार से अधिक पदों पर सफलतापूर्वक भर्ती पूरी की है।"
- प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री
इसके अलावा, उन पदों को भी प्राथमिकता से भरा जा रहा है जो नियमित सेवा के तहत 40 से 50 साल पहले भरे गए थे, लेकिन अब कर्मचारियों के लगातार सेवानिवृत्त (Retire) होने के कारण तेजी से खाली हो रहे हैं।
नियामक आयोग के चेयरमैन के लिए 19 जून तक आवेदन
बिजली दरों और नियमों को तय करने वाले मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में खाली पड़े चेयरमैन के पद को भरने की कवायद तेज हो गई है। सरकार ने इसके चयन के लिए हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आगामी 19 जून तक अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) के कार्यालय में अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच-पड़ताल करने के बाद यह समिति किन्हीं दो अंतिम नामों की सिफारिश राज्य सरकार को भेजेगी, जिसके बाद जुलाई के अंत तक नए चेयरमैन की आधिकारिक घोषणा हो जाएगी।
एक साथ भर्ती न करने के पीछे सरकार की दूरगामी रणनीति
अखबार को मिली जानकारी के अनुसार, सरकार सभी 50 हजार पदों पर एक साथ या एक ही वर्ष में भर्ती करने से बच रही है। इसके पीछे दो मुख्य प्रशासनिक और व्यावहारिक कारण हैं:
भविष्य का संकट टालना: यदि सभी पदों को एक ही साल में भर दिया गया, तो आज से 30 से 35 वर्ष बाद ये सभी कर्मचारी एक साथ ही सेवानिवृत्त होंगे। ऐसी स्थिति में अचानक बिजली कंपनियों का ढांचा खाली हो जाएगा और उपभोक्ता सेवाओं पर इसका बेहद विपरीत असर पड़ेगा, क्योंकि एक साथ खाली होने वाले हजारों पद दोबारा तुरंत नहीं भरे जा सकेंगे।
युवाओं को समान अवसर: एक ही वर्ष में पूरी भर्ती निकाल देने से उन युवाओं को बड़ा नुकसान होगा जिनकी शैक्षणिक योग्यता फिलहाल अधूरी है या जो भर्ती के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा (Age Limit) को पार नहीं कर पाए हैं। चरणबद्ध भर्ती से आने वाले वर्षों में भी युवाओं को लगातार मौके मिलते रहेंगे।


