नासा की दिग्गज अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने भारत दौरे के दौरान कहा कि वह गुजरात में अपने पैतृक गांव जाना जरूर चाहेंगी, क्योंकि भारत और खासतौर पर गुजरात से उनका भावनात्मक और पारिवारिक जुड़ाव है।सुनीता विलियम्स के पिता दीपक पंड्या गुजरात से हैं। यही वजह है कि भारत आने को वह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का अवसर मानती हैं।
केरल साहित्य महोत्सव में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मैं भारतीय मूल की हूं और मेरे लिए यह जानना बहुत अहम है कि मैं कहां से आई हूं। गुजरात जाना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत मायने रखता है। उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद पृथ्वी को ऊपर से देखने का अनुभव इंसान की सोच बदल देता है। उनके शब्दों में जब आप अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखते हैं, तो सीमाएं, झगड़े और लड़ाइयां बहुत छोटी लगने लगती हैं।
रिटायरमेंट के बाद भारत यात्रा
सुनीता विलियम्स 27 साल नासा में सेवा देने के बाद दिसंबर 2025 में रिटायर हुईं
करीब 10 साल बाद भारत आईं
दिल्ली और केरल में छात्रों, वैज्ञानिकों और युवाओं से संवाद किया
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 600 से ज्यादा दिन बिताए
एक महिला के रूप में सबसे ज्यादा स्पेसवॉक का रिकॉर्ड
भारत से खास लगाव
सुनीता विलियम्स का कहना है कि भारत, खासकर युवा पीढ़ी में विज्ञान और अंतरिक्ष को लेकर बढ़ती रुचि उन्हें बेहद प्रेरित करती है। गुजरात के पैतृक गांव जाना उनके लिए उसी जुड़ाव का अगला कदम है।

