मंदसौर, ललित शंकर धाकड़। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के गरोठ नगर में दशहरा उत्सव अपनी अनोखी परंपरा के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है, जहां यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। मंदसौर जिले के इस नगर में शारदीय नवरात्रि के साथ-साथ चैत्र नवरात्रि में भी दशमी के अवसर पर रावण दहन किया जाता है। इस वर्ष भी चैत्र नवरात्रि एवं दशहरा उत्सव समिति के तत्वावधान में श्रीराम नवमी के दूसरे दिन भव्य आयोजन किया गया।


सुबह से ही नगर में उत्सव का माहौल बना रहा और शाम को भगवान श्री लक्ष्मीकांत मंदिर से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। गाजे-बाजे और जयकारों के साथ यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान पहुंची, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से मौजूद थे।


आयोजन समिति के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और गरोठ ही प्रदेश का एकमात्र ऐसा नगर है जहां श्रीराम नवमी के दूसरे दिन दशहरा मनाया जाता है। इस आयोजन में आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।


रात्रि करीब 9 बजे विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के बाद आतिशबाजी के बीच 31 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। जैसे ही रावण दहन हुआ, पूरा मैदान “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने इस दृश्य का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।

गरोठ की इस परंपरा की एक और खास बात यहां बनने वाली सिंघाड़े की गुड़ वाली विशेष सेव है, जिसे स्थानीय होटल व्यवसायी तैयार करते हैं। रावण दहन के बाद लोग इस सेव को खरीदकर घर ले जाते हैं और इसे परंपरा के रूप में निभाते हैं।