मॉस्को। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुधवार को कहा कि यूक्रेन में शांति समझौते को लेकर अमेरिका ने अभी तक अपने ही प्रस्तावों का जवाब नहीं दिया है, जो उसने अलास्का के एंकरेज में दिए थे।
सर्गेई लावरोव ने प्रिमाकोव रीडिंग्स इंटरनेशनल साइंटिफिक और एक्सपर्ट फोरम में बोलते हुए कहा कि रूस-अमेरिका शिखर बैठक से पहले रूस को 'बहुत स्पष्ट प्रस्ताव' दिए गए थे, जिन्हें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार कर लिया था।
रूसी समाचार एजेंसी 'टास' के अनुसार, लावरोव ने कहा, "हमें लगा था कि वहां एक सहमति बन गई है। लेकिन एक हफ्ता बीत गया, फिर दो हफ्ते। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूरोपीय नेताओं से सलाह लेने के लिए वॉशिंगटन चले गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी वहां किसी तरह चर्चा हुई। लेकिन आखिर में अभी तक हमें उस अमेरिकी प्रस्ताव का जवाब नहीं मिला है, जिसका हमने समर्थन किया था। फिलहाल स्थिति यही है।"
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि अलास्का में बनी सहमति पहले ही एक समझौते का रूप थी।
उन्होंने कहा कि अब हमें कहा जा रहा है कि अभी बात नहीं बन रही है, कुछ और रियायत देनी होगी। हमने वहां कोई रियायत नहीं दी थी। हमने सिर्फ इस बात पर सहमति जताई थी कि लड़ाई कैसे खत्म की जाए और बाकी मुद्दों को बातचीत की मेज पर कैसे सुलझाया जाए। हमें भरोसा था कि इससे उन लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी, जिन्हें राष्ट्रपति ने तय किया है, और यह काम धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा।
लावरोव ने कहा कि यूक्रेन के मुद्दे को हटाने की जरूरत पर अमेरिका ने ही जोर दिया था और रूस को लगा था कि अलास्का में इस मामले को सुलझा लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद अमेरिका ने रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को बढ़ाया और नए प्रतिबंध भी लगाए।
रशिया-यूनाइटेड स्टेट्स समिट इन एंकरेज में राष्ट्रपति पुतिन और ट्रंप ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर चर्चा की थी।
पिछले साल दिसंबर में लावरोव ने कहा था कि युद्ध खत्म होने को लेकर लगाई जा रही भविष्यवाणियों के बावजूद रूस यूक्रेन में अपने लक्ष्यों को हासिल करने की कोशिश जारी रखेगा। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति पुतिन ने रूस के उद्देश्यों को साफ और स्पष्ट रूप से बताया है।
टास की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लावरोव ने यूक्रेन समझौते पर एक बैठक में कहा था, "हमारे लक्ष्यों को हमारे राष्ट्रपति ने साफ और बिना किसी भ्रम के बताया है और अलास्का में इस पर विस्तार से चर्चा हुई थी। वहां इस बात को लेकर सहमति बनी थी कि इन लक्ष्यों की ओर कैसे बढ़ा जाए। यह केवल युद्धविराम या थोड़े समय के लिए रुकने की बात नहीं थी, बल्कि लंबे समय तक टिकने वाली शांति की दिशा में कदम था। हम किसी के तय किए हुए समय के हिसाब से नहीं, बल्कि इसी रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।"
उन्होंने कहा, "हमारे लिए सबसे जरूरी चीज असली मुद्दा है। और असली मुद्दा रूस की सुरक्षा और उन रूसी लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है, जिनके बारे में कीव सरकार ने कहा है कि वे आतंकवादी हैं और उनके अधिकार छीन लिए गए हैं। यही हमारा लक्ष्य है।"

