कैदियों को हाईकोर्ट से जमानत, फिर भी परिजन नहीं करवा रहे रिहाई...!

केन्द्रीय जेल सतना
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सतना, अंबिका केसरी। सतना सेंट्रल जेल में अलग-अलग मामलों में सजा काट रहे 6 कैदी ऐसे है, जिन्हें हाईकोर्ट से जमानत तो मिल गई, लेकिन उनके खुद के परिजन उनकी रिहाई नहीं करवा रहे है। जबकि इस संबंध में बार-बार जेल प्रशासन की ओर से इनके परिजनों से संपर्क कर इनकी रिहाई की पेशकश की जा रही है।
इन कैदियों में 377 के मामले में रायसेन जिले का रामकीर्तन दास, पन्ना जिले के 302 मामले में इमाम खान, बिहार राज्य का पास्को एक्ट का गणेश शर्मा, सतना के किटहा निवासी आईपीसी 332 व 333 का आरोपी राजा भैया डोहर, व पन्ना जिले का 302 का आरोपी नत्थूलाल प्रजापति है। जेल प्रबंधन का कहना है कि कुछ कैदियों का अपराध ऐसा होता है जिनसे उनके परिजन भी खिन्न हो जाते है। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी परिजनों द्वारा कैदियों को जेल से छुड़ाने में देरी या रिहाई न होने का मुख्य कारण जमानत की शर्तों (जैसे बांड भरना, जमानतदार ढूंढना, या आर्थिक जरूरतें पूरा करना) को पूरा न कर पाना, और जेल प्रशासन एवं कोर्ट के बीच आदेशों के संचार में होने वाली देरी है भी माना जा सकता है।
इसके अलावा कई बार आरोपी के पास जरूरी कागजात, जमानतदार या आर्थिक क्षमता नहीं होती, जिससे वह जमानत बांड नहीं भर पाता। कुछ मामलों में, परिवार के सदस्य कैदी की दूसरी आपराधिक गतिविधियों या सामाजिक कारणों से उसे छुड़ाने में आनाकानी करते हैं, या वे खुद ही कोई कदम नहीं उठाते। हालांकि इन सभी बिंदुओं पर कैदियों के परिजनों को होने वाली परेशानियों से जेल प्रबंधन न साफ इंकार किया है। प्रबंधन का कहना है कि हाईकोर्ट से जैसे ही जमानत की अर्जी प्राप्त होती है, उसके तुरंत बाद कैदियों के परिजनों से बार-बार संपर्क किया जा रहा है। लेकिन कैदियों के परिजनों की ओर से कोई सार्थक जवाब नहीं मिलता। जिसके कारण इन 6 कैदियों को अभी तक जेल में रखा गया है।
