अयोध्या राम मंदिर के पत्थरों से आकार ले रहा देश का पहला संत रविदास मंदिर

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सागर, (जीशान खान)। अयोध्या धाम के श्रीराम मंदिर में उपयोग हुए राजस्थान के धौलपुर-वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों से सागर में देश का प्रथम भव्य संत रविदास मंदिर आकार ले रहा है। करीब 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह मंदिर 66 फीट ऊंचा होगा और इसके गर्भगृह में किसी भी प्रकार के आयरन का उपयोग नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्य पूरी तरह पत्थर, रेत और गिट्टी से किया जा रहा है।
कलेक्टर श्री संदीप जी. आर. ने बताया कि संत रविदास जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा इस मंदिर और संग्रहालय की घोषणा की गई थी, जिसका भूमि पूजन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया था। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निर्माण कार्य की सतत निगरानी की जा रही है।
यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समानता, भक्ति आंदोलन और संत रविदास की शिक्षाओं को समर्पित सांस्कृतिक-आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। संत रविदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जाति भेद की आलोचना की और समानता, कर्म और ईश्वर-भक्ति का संदेश दिया, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का उद्देश्य इस परियोजना का प्रमुख आधार है।

12 एकड़ में विकसित होगा मंदिर एवं संग्रहालय परिसर
संत रविदास मंदिर एवं संग्रहालय परिसर लगभग 12 एकड़ भूमि में विकसित किया जा रहा है। इसमें नागर शैली का मुख्य मंदिर, जलकुंड, चार गैलरी वाला संग्रहालय, पुस्तकालय, संगत सभाखंड, भक्त निवास और विशाल अल्पाहार गृह शामिल हैं। संग्रहालय में संत रविदास के जीवन, भक्ति आंदोलन में उनके योगदान, दर्शन और साहित्य को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
पुस्तकालय में आध्यात्मिक और धार्मिक ग्रंथों के साथ शोधार्थियों के लिए अध्ययन की सुविधाएं होंगी। संगत सभाखंड में व्याख्यान, संगोष्ठियां और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। भक्त निवास में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने की समुचित व्यवस्था रहेगी।

रोजगार के नए अवसर भी होंगे सृजित
परियोजना के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। टूरिज्म विभाग के सहायक अभियंता श्री मनीष डेहरिया ने बताया कि निर्माण एजेंसी द्वारा अब तक लगभग 25 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। मंदिर का फाउंडेशन पूरा हो चुका है, जबकि संग्रहालय, डोरमेट्री, भक्त निवास, बाउंड्रीवॉल और अन्य संरचनाओं का कार्य प्रगति पर है।
संत रविदास मंदिर एवं संग्रहालय के माध्यम से आधुनिक विकास और कलात्मकता के साथ संत रविदास की वाणी, विचार और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा, जिससे यह स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं और शोधार्थियों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र बनेगा।
