सतना (अंबिका केशरी)। शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त रखने की मांग को लेकर प्रदेश के शिक्षकों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को अब पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना अन्यायपूर्ण है। ज्ञापन में बताया गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय, गौतम नगर भोपाल द्वारा 2 मार्च 2026 को जारी पत्र के आधार पर प्रदेश में ऐसी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसके तहत RTE लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। शिक्षकों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद यह प्रक्रिया लागू की जा रही है। आदेश के अनुसार यदि शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं करते हैं तो उन्हें अयोग्य मानते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जा सकती है। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में ऐसे हजारों शिक्षक हैं जिन्होंने 20 से 25 वर्षों तक निष्कलंक और सम्मानजनक सेवाएं दी हैं। अब सेवा के अंतिम वर्षों में पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने से शिक्षकों में असमंजस और मानसिक तनाव की स्थिति बन गई है। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद इस प्रकार सेवा समाप्ति का खतरा उनके सम्मान और भविष्य दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा करेगा। शिक्षकों ने महामहिम राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट प्रदान की जाए। उनका तर्क है कि जब उनकी नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी, तब बाद में लागू प्रावधानों के आधार पर उनकी सेवा पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं है। ज्ञापन में चेतावनी भी दी गई है कि यदि उन्हें पात्रता परीक्षा से मुक्त नहीं किया गया तो सामूहिकइच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।
मध्य प्रदेशसतनाटीईटी के विरोध में शिक्षकों ने मांगी सामूहिक इच्छामृत्यु, राष्ट्रपति-पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
टीईटी के विरोध में शिक्षकों ने मांगी सामूहिक इच्छामृत्यु, राष्ट्रपति-पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

PeptechTime
13 मार्च 2026, 12:52 pm IST
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