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सुनीता विलियम्स बोलीं- चांद पर जाना चाहती हूं

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21 जनवरी 2026, 05:33 am IST
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नई दिल्ली। भारतीय मूल की पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने मंगलवार को नई दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में युवाओं के साथ एक इंटरैक्टिव सेशन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में एक नई 'स्पेस रेस' चल रही है, लेकिन इसका मकसद इंसानियत को चांद पर टिकाऊ, उत्पादक और लोकतांत्रिक तरीके से लौटाना होना चाहिए।

विलियम्स ने भावुक होकर कहा, "भारत आना मेरे लिए घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि मेरे पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे।" उन्होंने स्पेस ट्रैवल को टीम स्पोर्ट बताया और जोर दिया कि विभिन्न देशों को मिलकर काम करना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे अंटार्कटिका में होता है।

स्पेस के कॉमर्शियलाइजेशन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इससे नई टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट, स्पेस एक्सपेरिमेंट्स और 3D प्रिंटिंग जैसे क्षेत्रों में रोजगार और इनोवेशन के अवसर बढ़ते हैं।

चांद पर जाने के सवाल पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "मैं चंद्रमा पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे मार डालेंगे। अब घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है। अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा।"

60 वर्षीय सुनीता विलियम्स ने हाल ही में 27 साल की सेवा के बाद नासा से रिटायरमेंट लिया है (दिसंबर 2025 में प्रभावी)। उन्होंने तीन अलग-अलग रॉकेटों का इस्तेमाल कर अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए और 9 स्पेसवॉक किए, जिसमें कुल 62 घंटे लगे।

उन्होंने अपने हालिया बोइंग स्टारलाइनर मिशन का जिक्र किया, जो 8 दिन का प्लान था लेकिन तकनीकी खराबी (थ्रस्टर में गड़बड़ी) के कारण 9 महीने से ज्यादा (मार्च 2025 तक) हो गया। इस दौरान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर मल्टी-कल्चरल क्रू के साथ त्योहार मनाने की यादें साझा कीं।

स्पेस से धरती देखने पर उन्होंने कहा, "यह महसूस होता है कि हम सब एक हैं और हमें ज्यादा करीब से मिलकर काम करना चाहिए।" अंतरिक्ष कचरे (स्पेस डेब्री) को बड़ी चुनौती बताते हुए ISS को नई टेक्नोलॉजी टेस्ट करने की जगह बताया।

कार्यक्रम के दौरान सुनीता ने दिवंगत भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट कल्पना चावला की 90 वर्षीय मां संयोगिता चावला और बहन दीपा से मुलाकात की। वे मंच से उतरकर सबसे आगे बैठीं संयोगिता को गले लगाया। संयोगिता ने कहा कि सुनीता उनके परिवार की सदस्य जैसी हैं। 2003 के स्पेस शटल कोलंबिया हादसे के बाद सुनीता तीन महीने तक उनके घर आती थीं और परिवार को सहारा देती थीं। दोनों एक-दूसरे को प्रोफेशन में प्रेरित करती थीं।

सुनीता को कार्यक्रम में मोमेंटो भी भेंट किया गया। वे फिलहाल भारत दौरे पर हैं और 22 जनवरी से शुरू होने वाले केरल लिटरेचर फेस्टिवल में भी शामिल होंगी।

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