मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर मुस्लिम समाज का मौन जुलूस

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सागर (जीशान खान) – सागर जिले में चल रहे विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर ) अभियान के दौरान जारी आपत्तियों और नोटिसों को लेकर मुस्लिम समाज में गहरा असंतोष व्याप्त है। समाज के लोगों का आरोप है कि अधिकांश नोटिस और आपत्तियां केवल मुस्लिम नामों पर ही केंद्रित हैं, जिससे भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।
शुक्रवार को बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग खेल परिसर मैदान के पास एकत्र हुए। यहां से उन्होंने पूरी तरह मौन और शांतिपूर्ण जुलूस निकाला, जिसमें किसी प्रकार की नारेबाजी या अव्यवस्था नहीं हुई। जुलूस अनुशासित ढंग से कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जारी आपत्तियों का अवलोकन करने पर स्पष्ट है कि ज्यादातर मामले मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं से संबंधित हैं। समाज का कहना है कि यदि किसी विशेष समुदाय को लक्षित कर परेशान किया जा रहा है, तो यह भारतीय संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और देश की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के विरुद्ध है। ऐसी कार्रवाई सामाजिक सौहार्द को भी खतरे में डाल सकती है।
इस मौके पर मुस्लिम समाज के वरिष्ठ धर्मगुरु मुफ्ती अबरार उल हक ने कहा, "मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। यदि इसमें धर्म के आधार पर कोई हस्तक्षेप हो रहा है, तो यह अत्यंत चिंताजनक है। हमने पूरी शांति और संयम के साथ अपनी बात रखी है। प्रशासन से अपेक्षा है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन न हो।"
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र उचित कदम नहीं उठाए गए, तो मुस्लिम समाज कानूनी रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।
जुलूस और ज्ञापन सौंपने के दौरान सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे। यह विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहा, जिसने प्रशासन तक अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाई।
एसआईआर अभियान के तहत मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में मतदाता सूची की शुद्धिकरण प्रक्रिया चल रही है, लेकिन सागर में इसकी धार्मिक आधार पर चुनिंदा कार्रवाई के आरोपों ने विवाद को जन्म दिया है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
