सागर,जीशान खान। शहर के गोपालगंज थाना क्षेत्र में एक संगठित और सुनियोजित ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें एक युवक ने फर्जी गोल्ड लोन स्लीप के जरिए फाइनेंस कंपनी से करीब 18 लाख 50 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए। दस्तावेजों की जांच में पूरा मामला खुला, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार मामला इतना शातिर तरीके से अंजाम दिया गया कि शुरुआत में किसी को शक तक नहीं हुआ। आरोपी ने पहले बैंक से संपर्क कर खुद को दूसरे बैंक का लोनधारक बताया और कम ब्याज का हवाला देकर गोल्ड लोन ट्रांसफर कराने की इच्छा जताई। शिकायतकर्ता सतीष कुमार यादव के अनुसार, दमोह जिले के ग्राम समन्ना निवासी घनश्याम रैकवार ने संपर्क किया। उसने बताया कि उसका लोन ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में चल रहा है और वह इसे मणप्पुरम फाइनेंस में ट्रांसफर कराना चाहता है। आरोपी अपने साथ एक ऐसी गोल्ड लोन स्लीप लेकर पहुंचा, जिसमें बैंक मैनेजर के फर्जी हस्ताक्षर और जाली सील लगी हुई थी। कागज इतने वास्तविक लगे कि शाखा स्तर पर उन्हें सही मान लिया गया और प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई।
अगले दिन आरोपी शाखा पहुंचा और औपचारिकताएं पूरी कराईं। इसके बाद कंपनी ने 18 लाख 50 हजार रुपए उसके खाते में ट्रांसफर कर दिए। रकम मिलते ही उसने पुराने बैंक की प्रक्रिया पूरी करने का बहाना बनाया और वहां से निकल गया। जब कई दिन तक आरोपी वापस नहीं लौटा, तो कंपनी ने संबंधित बैंक से दस्तावेजों का सत्यापन कराया। जांच में पता चला कि प्रस्तुत की गई स्लीप पूरी तरह फर्जी है और उस नाम से कोई लोन खाता मौजूद ही नहीं है। गोपालगंज थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा ने बताया कि, फाइनेंस कंपनी की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। दस्तावेजों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोपी की तलाश जारी है, जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। इस घटना ने वित्तीय संस्थानों की दस्तावेज जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर सख्ती बरती जाती, तो इतनी बड़ी ठगी रोकी जा सकती थी। सागर का यह मामला दिखाता है कि ठग अब तकनीकी और दस्तावेजी चालाकियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में बैंक और फाइनेंस कंपनियों को हर स्तर पर सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

