भोजशाला में बसंत पंचमी पर कड़ी सुरक्षा के बीच पूजा शुरू, दोपहर में नमाज के लिए खाली होगा परिसर

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धार | मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और संवेदनशील धार्मिक स्थल भोजशाला में आज बसंत पंचमी के अवसर पर आस्था और सुरक्षा का कड़ा पहरा है। शुक्रवार को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ होने के कारण पैदा हुई संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए समय के अनुसार, सूर्योदय के साथ ही हिंदू पक्ष ने मां सरस्वती का पूजन और पारंपरिक अनुष्ठान प्रारंभ कर दिया है।
सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा: 8000 जवान तैनात
कानून-व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की भारी तैनाती की गई है। लगभग 8000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी धार की सड़कों और भोजशाला के आसपास मुस्तैद हैं। तकनीक का सहारा लेते हुए पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित कैमरों से की जा रही है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का 'टाइम-स्लॉट' फॉर्मूला
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार आज का कार्यक्रम इस प्रकार तय किया गया है:
प्रातः काल से दोपहर 1 बजे तक: हिंदू पक्ष द्वारा सरस्वती पूजन, हवन और धार्मिक अनुष्ठान।
दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक: परिसर को पूरी तरह खाली कराया जाएगा और इस दौरान मुस्लिम पक्ष द्वारा जुमे की नमाज अदा की जाएगी।
दोपहर 3 बजे से सूर्यास्त तक: नमाज संपन्न होने के बाद पुनः हिंदू पक्ष को पूजा के लिए परिसर सौंपा जाएगा।
शांति और सौहार्द की अपील
धार जिला प्रशासन और पुलिस ने दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर शांति बनाए रखने की अपील की है। कलेक्टर और एसपी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था विशेष रूप से सांप्रदायिक सौहार्द को ध्यान में रखकर बनाई गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि किसी भी पक्ष की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
क्या है विवाद का केंद्र?
भोजशाला का मामला लंबे समय से विवादों में रहा है। हिंदू समाज इसे मां सरस्वती का मंदिर (वाग्देवी मंदिर) मानता है, जबकि मुस्लिम समाज इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। सामान्य दिनों में मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की अनुमति होती है, लेकिन बसंत पंचमी शुक्रवार को आने पर दोनों समुदायों की धार्मिक मान्यताएं एक ही समय पर टकराती हैं, जिसके समाधान के लिए कोर्ट ने यह 'विशेष टाइम-स्लॉट' निर्धारित किया है।
अगली अपडेट: दोपहर 1 बजे जब परिसर नमाज के लिए खाली कराया जाएगा, उस समय की स्थिति पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी।
