नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपए की एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह राहत आम उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुंच रही है और इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह कटौती आखिर किसके लिए है। उन्होंने आईएएनएस से कहा, "यह कमी तेल कंपनियों के लिए है, उपभोक्ताओं के लिए नहीं। आज अगर आप पेट्रोल भरवाने जाएंगे तो देखिए कि कीमत में असल में कितनी कमी आई है सिर्फ कुछ पैसे, जो आम आदमी के लिए लगभग कुछ भी नहीं है।"


वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस फैसले को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बढ़ती तेल कीमतों के बीच जनता को कुछ राहत देना जरूरी था, लेकिन उन्हें लगता है कि यह फैसला काफी हद तक चुनावी कारणों से लिया गया है.अगर आपको याद हो, जैसे ही ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष शुरू हुआ, उसी समय सरकार ने एलपीजी की कीमतें बढ़ा दी थीं, चाहे वह कमर्शियल हो या घरेलू।" राजस्थान के जयपुर में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती पहले ही कर दी जानी चाहिए थी।


उन्होंने कहा, "एक्साइज ड्यूटी बहुत पहले कम होनी चाहिए थी। 'स्पेशल सेस' के नाम पर जो टैक्स लिया जा रहा है, उसमें राज्यों को कोई हिस्सा नहीं मिलता। कच्चे तेल के जो दाम कम हुए, उसका लाभ जनता को नहीं मिल पाया।" स्पेशल सेस या 'उपकर' एक ऐसा अतिरिक्त कर है, जिसे सरकार किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए लागू करती है। आम भाषा में, यह 'टैक्स पर लगने वाला टैक्स' है।