मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से लखनऊ हड़कंप

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बरेली में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा पिछले 24 घंटों से देश की सुर्खियों में बना हुआ है। एक उच्च पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा सनातन धर्म के अपमान और सामान्य वर्ग के हितों की दुहाई देते हुए पद छोड़ना, प्रशासनिक गलियारों में एक विरल घटना माना जा रहा है। इस मामले ने न केवल सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है, बल्कि राज्य की सवर्ण राजनीति को भी नई हवा दे दी है। पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 26 जनवरी की दोपहर को हुई, जब अलंकार अग्निहोत्री ने अचानक अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
उन्होंने अपने पांच पन्नों के पत्र में नए UGC नियमों और माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार को मुख्य कारण बताया। अग्निहोत्री ने पत्र में कई कड़वे सामाजिक और राजनीतिक सवाल उठाए, जिसके बाद ब्राह्मण सभा और सवर्ण संगठन खुलकर उनके समर्थन में आ गए। शाम ढलते-ढलते यह मामला उस समय और गरमा गया जब अग्निहोत्री ने जिला प्रशासन पर सनसनीखेज आरोप लगाए। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें जिलाधिकारी आवास पर करीब 45 मिनट तक जबरन बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ से आए एक फोन कॉल के जरिए उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और उनके प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग हुआ। हालांकि, जिला प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि यह केवल एक सामान्य प्रशासनिक बातचीत थी और बंधक बनाने जैसी कोई बात नहीं हुई।
देर रात शासन ने अलंकार अग्निहोत्री के आचरण को प्रशासनिक अनुशासन का उल्लंघन मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। शासन ने स्पष्ट किया कि जब तक विभागीय जांच पूरी नहीं होती, अग्निहोत्री शामली जिला मुख्यालय से अटैच रहेंगे। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच बरेली मंडल के कमिश्नर को सौंपी गई है। वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अलंकार अग्निहोत्री का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अग्निहोत्री ने वर्षों की मेहनत से प्राप्त पद को धर्म की रक्षा के लिए त्याग कर समाज को एक बड़ा संदेश दिया है। शंकराचार्य ने नए यूजीसी कानून को हिंदू समाज में फूट डालने की साजिश करार देते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की।
अलंकार अग्निहोत्री के विरोध की सबसे बड़ी वजह यूजीसी के वे नए नियम हैं, जिन्हें वे सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए काला कानून मान रहे हैं। उनका आरोप है कि समता समिति के माध्यम से सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ फर्जी शिकायतें और शोषण बढ़ेगा। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और भूमिहार समाज के बच्चों को भविष्य में संदिग्ध की तरह देखा जाएगा। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी ही जाति के जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे कॉर्पोरेट कर्मचारियों की तरह चुप बैठकर समाज के साथ अन्याय कर रहे हैं। फिलहाल अलंकार अग्निहोत्री के समर्थन में बरेली से लेकर पूरे प्रदेश में UGC हटाओ, देश बचाओ के नारे गूंज रहे हैं। ब्राह्मण सभा ने चेतावनी दी है कि यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया और अधिकारियों का दमन बंद नहीं हुआ, तो विरोध-प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा। कई सवर्ण भाजपा नेताओं द्वारा भी विरोध स्वरूप इस्तीफे की पेशकश की खबरें सामने आ रही हैं।
