नीम करोली बाबा से कैसे कहें अपने मन की बात

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मथुरा। वर्तमान समय में अध्यात्म जगत के प्रमुख संत प्रेमानंद महाराज अपने सरल और प्रभावशाली उपदेशों के कारण देश-दुनिया में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर उनके सत्संग के वीडियो अक्सर वायरल होते हैं, जिनमें वे भक्तों की जटिल शंकाओं का समाधान अत्यंत सहजता से करते हैं। हाल ही में उनके दरबार में एक महिला भक्त पहुंची, जिसने महान संत नीम करोली बाबा के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त करते हुए एक भावनात्मक प्रश्न पूछा।
नीम करोली बाबा, जिन्हें हनुमान जी का अवतार माना जाता है, ने पूरी दुनिया को प्रेम और निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया था। उत्तराखंड के कैंची धाम स्थित उनके आश्रम में आज भी लाखों भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। प्रेमानंद महाराज के समक्ष उस महिला भक्त ने अपनी व्यथा रखते हुए कहा, महाराज जी, हम नीम करोली बाबा के अनन्य भक्त हैं, लेकिन हमने उनके साक्षात दर्शन नहीं किए हैं। कभी-कभी मन में यह टीस उठती है कि काश हम अपने गुरु के सामने बैठकर अपने मन की बात कह पाते। क्या यह कभी संभव हो पाएगा?
प्रेमानंद महाराज ने इस जिज्ञासा का अत्यंत मार्मिक उत्तर दिया। उन्होंने महिला को सांत्वना देते हुए कहा कि गुरु से अपनी बात कहने के लिए उनके शरीर के सम्मुख होना अनिवार्य नहीं है। महाराज जी ने समझाया, हमारा हृदय ही गुरुदेव का निवास स्थान है। जो बात हमारे हृदय में है, उसे उन तक पहुंचाने में भला क्या बाधा हो सकती है? जैसे एक बच्चा अपनी मां से कुछ नहीं छुपा पाता, वैसे ही गुरु भी शिष्य के अंतर्मन को जानते हैं। उन्होंने आगे कहा कि गुरु का मंगल विधान सदैव शिष्य के साथ रहता है। यदि गुरु डांटते भी हैं, तो वह डांट भी वास्तव में दुलार और शिष्य के कल्याण के लिए ही होती है। महाराज के इस उत्तर ने न केवल उस महिला, बल्कि वहां मौजूद अन्य भक्तों को भी गुरु-शिष्य के आध्यात्मिक संबंध की गहराई का बोध कराया।
