मुंबई। अमरावती के महिला जिला अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में आग लगने से तीन नवजातों की मौत के बाद मुंबई के कामा अस्पताल में भी मरीजों की सुरक्षा को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई गई। कामा अस्पताल के डीन डॉ. तुषार पालवे ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।डॉ. पालवे ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "अमरावती की घटना में वेंटिलेटर में धमाका होने की बात सामने आई है। हमने सुना कि वेंटिलेटर में धमाका हुआ था, उसके बाद गैस बनी। पूरे एनआईसीयू में आग लग गई और तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। मेरा मानना है कि वेंटिलेटर में एक कंप्रेसर होता है। कभी-कभी गर्मी की वजह से उसमें धमाका हो जाता है और आग लग जाती है।"
उन्होंने बताया, "एनआईसीयू में ऑक्सीजन लाइन होने से आग तेजी से बढ़ सकती है। एनआईसीयू में ऑक्सीजन की सप्लाई ज्यादा रहती है, जिससे आग बढ़ सकती है। अगर एनआईसीयू में वेंटिलेशन नहीं रहेगा तो धुएं के निकलने के लिए जगह नहीं मिलती है। उसमें खिड़की रहती है, जो बंद रहती है।"
डॉ. पालवे ने कहा, "जो तीन मौतें हुई हैं, मुझे लगता है कि वह जलने की वजह से नहीं, बल्कि दम घुटने की वजह से हुई होगी। जो गैसें बनती हैं, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड या कार्बन डाइऑक्साइड होता है, वह ज्यादा होने की वजह से नवजातों की मौत हुई। वे उस समय ज्यादा कमजोर होते हैं, लेकिन अधिकतम बच्चों को बचाया भी गया है। शुरुआती खबरों से लगता है कि थोड़ी वेंटिलेशन की कमी रही होगी, जिसकी वजह से बच्चों की मौत हो गई।"
कामा अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों पर डॉ. पालवे ने बताया, "हमारे यहां पर फायरवर्क पूरा हो चुका है। यहां पर एनआईसीयू कंबाइंड नहीं है। अलग-अलग 16 केबिन बनाए गए हैं, जिसमें प्रत्येक में 1 या 2 बच्चे रखे गए हैं, एक साथ कहीं पर भी ज्यादा बच्चे नहीं रखे। ऐसे में अगर एक केबिन में आग लगती है तो वह दूसरी जगह पर नहीं फैलती।"
उन्होंने कहा कि इस हादसे से यह सीख मिलती है कि एनआईसीयू में मौजूद इलेक्ट्रिकल उपकरणों और लगातार चलने वाली मशीनों जैसे वेंटिलेटर का नियमित मेंटेनेंस बेहद जरूरी है।
डॉ. पालवे ने दोहराया कि शुरुआती रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि अमरावती अस्पताल में हवा आने-जाने का सही इंतजाम नहीं था। इसी वजह से बच्चों की दम घुटने से मौत हुई।




