गुहावटी, 27 मई । असम विधानसभा में सोमवार को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया था। इस विधेयक पर विधानसभा सत्र में चर्चा जारी है। सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री यूसीसी को सभी वर्गों के लिए लाभदायक बता रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों के नेता इसका लगातार विरोध कर रहे हैं।

कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकदर ने कहा, "असम में यूसीसी की कोई आवश्यकता नहीं है। यूसीसी लागू होने के बाद असम के लोगों को कोई लाभ नहीं होगा। इसे केवल राजनीतिक एजेंडे के लिए लाया गया है। इसे भाजपा के लाभ के लिए लाया गया है और इससे हमारे लोगों को कोई लाभ नहीं होगा।"

रायजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने कहा, "यूसीसी असम के लोगों के निजी जीवन पर हमला है। यह राज्य को लोगों की निजी गोपनीयता पर नजर रखने का एक तरीका देता है। नौकरशाही आपकी जीवनशैली पर नजर रखेगी और आपके जीवन पर प्रत्यक्ष निगरानी रखी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि निजी जीवन पर विधानसभा में कुछ नहीं किया जा सकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री लोगों के जीवन पर नजर रखने के लिए यह विधेयक लेकर आए हैं। हम यूसीसी को वापस कराएंगे।"

कांग्रेस विधायक तंजील हुसैन ने कहा, "हम यूसीसी का विरोध करते हैं और आगामी सत्र में हम विरोध प्रदर्शन करेंगे। वहीं, असम विधानसभा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने कहा, "यह निश्चित रूप से असम के लिए बहुत अच्छा होगा। यह असम की अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए भी अच्छा रहेगा। सरकार यूसीसी विधेयक लेकर आई है और मैं इस विधेयक के संबंध में सभी के साथ सहयोग करने का प्रयास करूंगा।"

विधानसभा सत्र से पहले असम विधानसभा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने कहा, "आज निश्चित रूप से असम के लिए बहुत अच्छा दिन होगा। सरकार यूसीसी विधेयक लेकर आई है और मैं इस विधेयक के संबंध में सभी के साथ सहयोग करने का प्रयास करूंगा।"