छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक अत्यंत हृदय विदारक खबर सामने आई है, जहाँ गुरुवार की शाम खुशियों और उत्साह का माहौल अचानक चीख-पुकार में तब्दील हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सभा में शामिल होकर लौट रहे ग्रामीणों की बस सड़क पर काल बनकर पलटी, जिसने देखते ही देखते 10 परिवारों के चिराग बुझा दिए। इस भीषण हादसे का सार उस अनियंत्रित रफ्तार और मोड़ पर छिपे खतरे में है, जिसने एक मासूम बच्चे सहित 10 लोगों को मौत की नींद सुला दिया। उमरानाला चौकी क्षेत्र के चिखली गांव के पास हुआ यह हादसा अब प्रशासन की मुस्तैदी और घायलों के जीवन को बचाने की जद्दोजहद की परीक्षा ले रहा है।
मुख्यमंत्री की सभा से लौटते वक्त हुआ भीषण हादसा
जानकारी के अनुसार, हादसा गुरुवार शाम उस वक्त हुआ जब एक प्राइवेट बस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सभा से वापस लौट रही थी। बस जैसे ही चिखली गांव के पास पहुँची, वह अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क पर ही पलट गई। बस के पलटते ही मौके पर कोहराम मच गया। स्थानीय ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। मुख्यमंत्री की सभा से जुड़ा मामला होने के कारण शासन और प्रशासन में हड़कंप मच गया और आला अधिकारी आनन-फानन में भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए।
10 लोगों की दर्दनाक मौत और घायलों का चल रहा इलाज
हादसे की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने 10 लोगों को मृत घोषित कर दिया, जिनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल है। पुलिस और रेस्क्यू टीम ने बस में फंसे अन्य घायलों को सुरक्षित निकालकर तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया है, जहाँ उनका उपचार युद्ध स्तर पर जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस की रफ्तार और सड़क की स्थिति इस अनियंत्रित हादसे का मुख्य कारण हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और प्रशासन को घायलों के सर्वोत्तम इलाज के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी और जांच के घेरे में 'प्राइवेट बस' का संचालन
हादसे की सूचना मिलते ही उमरानाला चौकी क्षेत्र में पुलिस छावनी जैसा नजारा दिखा। अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर जांच शुरू कर दी है कि आखिर बस के अनियंत्रित होने के पीछे तकनीकी खराबी थी या ड्राइवर की लापरवाही। मुख्यमंत्री की सभा जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में लगी प्राइवेट बसों की फिटनेस और क्षमता को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल, पूरा ध्यान घायलों की जान बचाने और मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाने पर केंद्रित है। छिंदवाड़ा का यह काला गुरुवार क्षेत्र के इतिहास में एक गहरे जख्म की तरह दर्ज हो गया है।



