भोपाल। मध्य प्रदेश के करीब 22.5 लाख बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारकों को केंद्र सरकार के फैसले से बड़ा झटका लगा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि में फिलहाल किसी भी तरह की बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। महंगाई के दौर में पेंशन बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे लाखों लाभार्थियों को इस फैसले से निराशा हुई है।


मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया कि नीति आयोग और अन्य मूल्यांकन अध्ययनों में पेंशन राशि बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की गई थी। अध्ययनों में सामने आया कि लाभार्थी इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से भोजन और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक जरूरतों के लिए करते हैं, इसके बावजूद फिलहाल राशि बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया है।


आंकड़ों के अनुसार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विशेष रूप से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना के तहत 1,01,470 लाभार्थियों के साथ प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि बिहार पहले स्थान पर है।


वित्तीय वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को 889.77 करोड़ रुपए की राशि जारी की है, जो उत्तर प्रदेश को मिले 813.48 करोड़ और बिहार को मिले 691.80 करोड़ रुपए से अधिक है।


प्रदेश में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 60 से 79 वर्ष के बुजुर्गों को कुल 600 रुपए प्रति माह मिलते हैं, जिसमें केंद्र सरकार 200 रुपए और राज्य सरकार 400 रुपए देती है। वहीं 80 वर्ष से अधिक आयु वालों को भी कुल 600 रुपए मिलते हैं, लेकिन इसमें केंद्र का हिस्सा 500 रुपए और राज्य का 100 रुपए होता है।


इसी तरह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना में 40 से 79 वर्ष की बीपीएल श्रेणी की विधवाओं को 600 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों 300-300 रुपए का योगदान देते हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के तहत 18 से 79 वर्ष के 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगों को भी 600 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों का 300-300 रुपए का अंश होता है। 80 वर्ष के बाद केंद्र का हिस्सा बढ़कर 500 रुपए और राज्य का हिस्सा घटकर 100 रुपए रह जाता है।