छतरपुर में अवैध प्लाटिंग का खेल जारी, अधिवक्ता प्रशांत भदौरिया ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन

Advertisement
छतरपुर, संजय अवस्थी। छतरपुर जिले में कृषि भूमि पर बिना डायवर्सन और वैधानिक अनुमति के अवैध प्लाटिंग का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस गंभीर मामले को लेकर अधिवक्ता प्रशांत भदौरिया ने कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपते हुए प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। आवेदन में अधिवक्ता भदौरिया ने आरोप लगाया कि जिले की विभिन्न मौजाओं में नियमों को ताक पर रखकर छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं। प्लाटिंग के दौरान सड़कों, नालियों और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए भी न्यूनतम जगह नहीं छोड़ी जा रही, जिससे आम नागरिकों के साथ खुला धोखा हो रहा है।
उन्होंने बताया कि मौजा धमौरा, रगोली, गौरगांय, छतरपुर एवं पलौठा सहित शहर के कई इलाकों में सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से अवैध प्लाटिंग के ठोस प्रमाण कलेक्टर को प्रस्तुत किए गए हैं। इन प्लॉटों की बिक्री के बाद जब प्रशासन इन्हें अवैध घोषित कर तोड़फोड़ की कार्रवाई करता है, तो सबसे अधिक नुकसान गरीब और मध्यम वर्गीय खरीदारों को उठाना पड़ता है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी निवेश कर दी होती है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन अवैध कॉलोनियों के लिए न तो रेरा (RERA) से कोई स्वीकृति ली जाती है और न ही नगर पालिका अथवा अन्य संबंधित विभागों से अनुमति प्राप्त की जाती है। इसके बावजूद अवैध प्लाटिंग का कार्य लगातार जारी है, जबकि प्रशासन की ओर से कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही।
अधिवक्ता प्रशांत भदौरिया ने आरोप लगाया कि यह पूरा अवैध कारोबार कुछ प्रभावशाली नेताओं के संरक्षण में संचालित हो रहा है, जिसके चलते प्रशासनिक अमला निष्क्रिय बना हुआ है। उन्होंने मांग की है कि जिला प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध प्लाटिंग करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और आम जनता को इस संगठित धोखाधड़ी से बचाए। कई ऐसे क्षेत्रों में भी प्लॉट बेचे जा रहे हैं जहां सड़क जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है, जिससे खरीदारों का गंभीर रूप से शोषण हो रहा है।
