Tuesday, March 10, 2026

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सुबह 9 बजे से डॉक्टरों की हड़ताल, मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार...!

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9 मार्च 2026, 09:30 am IST
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जबलपुर। जबलपुर स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज सहित मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सोमवार सुबह 9 बजे से जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी है। लंबित स्टाइपेंड संशोधन की मांग को लेकर की जा रही इस हड़ताल के कारण ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।


गांधी मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में पीपीटीसीटी काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर, फर्टिलिटी क्लिनिक और एएनसी रूम सहित कई व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। यहां सीनियर डॉक्टरों के साथ जूनियर डॉक्टर भी जिम्मेदारियां संभालते हैं, लेकिन हड़ताल के चलते कामकाज प्रभावित हो गया है।


इलाज के लिए पहुंचे मरीज अनवर ने बताया कि वे सुबह से अस्पताल में बैठे हैं और पैरों में दर्द सहित अन्य समस्याओं के बावजूद इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इसी दौरान सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें मीडिया से बात करने से रोक दिया।


जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक ओपीडी में सेवाएं नहीं दी जाएंगी। ऑपरेशन थिएटर (OT) में भी केवल अति गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। ऐसे में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन टल सकते हैं।


JDA के अनुसार सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन शासन के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है और न ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान किया गया है। कई बार शासन को अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।


JDA के नेतृत्व में करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस हड़ताल में शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों की रीढ़ माने जाते हैं और मरीजों के इलाज से लेकर उनकी मॉनिटरिंग तक की लगभग 70 प्रतिशत जिम्मेदारी निभाते हैं।


JDA जबलपुर के अध्यक्ष डॉ. शुभम शर्मा ने बताया कि आज दोपहर वे राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात करेंगे। इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।


डॉक्टरों ने बताया कि पिछले तीन दिनों से वे काली पट्टी लगाकर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। यदि सरकार जल्द निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर विरोध और तेज किया जा सकता है।

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