भोपाल, जीतेन्द्र यादव। राजधानी भोपाल में चुनावी सरगर्मी के बीच नरेला विधानसभा क्षेत्र में 'वोटर लिस्ट' को लेकर छिड़ा विवाद अब कानूनी और राजनैतिक लड़ाई में तब्दील हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला के खिलाफ एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंपकर उन पर हिंदू मतदाताओं को टारगेट करने और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कांग्रेस नेताओं ने राजनीतिक लाभ के लिए मतदाताओं पर दबाव बनाकर गलत एफिडेविट तैयार करवाए थे, जो अब जांच में झूठे पाए गए हैं।


एसडीएम की जांच में सही मिले मतदाता

विवाद की शुरुआत 7 मार्च को हुई थी, जब दिग्विजय सिंह और मनोज शुक्ला ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि नरेला की रतन कॉलोनी के एक ही घर में 30 से अधिक सदस्य मतदाता के रूप में दर्ज हैं। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन अधिकारी को बताया कि रिटर्निंग ऑफिसर (RO) और बीएलओ (BLO) द्वारा की गई गहन जांच में ये सभी मतदाता वैध और उसी पते के रहवासी पाए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं का दावा पूरी तरह आधारहीन है और वे केवल मतदाताओं को परेशान करने के लिए ऐसी झूठी शिकायतें कर रहे हैं।


मतदाताओं ने खोले दबाव के राज

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पीड़ित मतदाताओं ने खुद सामने आकर निर्वाचन अधिकारी को अपने 'काउंटर एफिडेविट' सौंपे। रहवासी मतदाता पोखन लाल साहू और हमीर सिंह यादव ने लिखित में जानकारी दी है कि दिग्विजय सिंह और मनोज शुक्ला द्वारा की गई शिकायत में उन पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए गए थे। मतदाताओं का कहना है कि उन्हें धमकाकर एफिडेविट तैयार करवाए गए, जबकि वे लंबे समय से उसी क्षेत्र के निवासी हैं।


झूठी शिकायत पर कार्रवाई की मांग

निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि संवैधानिक संस्थाओं का समय बर्बाद करने और आम नागरिकों को डराने के जुर्म में दिग्विजय सिंह और मनोज शुक्ला पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यह एक वर्ग विशेष के मतदाताओं का नाम कटवाने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की सोची-समझी साजिश है। अब देखना यह होगा कि मतदाताओं के इन जवाबी हलफनामों के बाद चुनाव आयोग इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है।