लंदन। रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही कुछ खास नहीं बढ़ी है। ब्रिटेन के यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) की रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेट से रोजाना जहाजों की आवाजाही अभी भी सिंगल डिजिट में बनी हुई है। इसका प्रमुख कारण ईरानी सैन्य गतिविधियां और समुद्री सुरक्षा से जुड़े गंभीर जोखिम हैं। पिछले कुछ महीनों में कई जहाज हमलों का शिकार भी हुए हैं।

यूकेएमटीओ के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में 103 जहाज होर्मुज स्ट्रेट में दाखिल हुए, जबकि 89 जहाज बाहर निकले। हालांकि, इन दोनों दिशाओं की कुल आवाजाही युद्ध से पहले के सात-दिन के औसत का करीब 20 प्रतिशत है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग पर वाणिज्यिक गतिविधियां अभी सामान्य स्थिति से काफी दूर हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की गतिविधियां भी जहाजों के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। इनमें ड्रोन की निगरानी उड़ानें, रेडियो के जरिए जहाजों को संपर्क करना और उन इलाकों में आवाजाही का खतरा शामिल है, जहां समुद्री बारूदी सुरंगों की आशंका बताई गई है।

होर्मुज में जारी सीमित वाणिज्यिक आवाजाही में तेल और अन्य तरल ईंधन ले जाने वाले टैंकरों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 45 प्रतिशत है। यह इस जलमार्ग के वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क में महत्व को रेखांकित करता है।

दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए होर्मुज बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने की स्थिति में ऊर्जा बाजारों, तेल कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है।

यूकेएमटीओ के आंकड़ों के अनुसार, स्ट्रेट के दक्षिणी ओमानी मार्ग को विशेष रूप से जोखिमपूर्ण माना जा रहा है। 6 जुलाई से यूकेएमटीओ द्वारा दर्ज 18 प्रोजेक्टाइल हमलों में से 16 इसी क्षेत्र में हुए हैं।

ऐसे में जहाज संचालक सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए इस मार्ग से गुजरने में सावधानी बरत रहे हैं।