ब्राह्मण समाज को संगठित करने की गतिविधियों से चर्चा में आए बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट, इस्तीफे के बाद खुफिया तंत्र पर उठे सवाल

Advertisement
उत्तर प्रदेश। के बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात रहे अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा इन दिनों देशव्यापी चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक पद पर रहते हुए समाज सेवा और एक विशिष्ट वर्ग को संगठित करने से जुड़ी उनकी गतिविधियों ने शासन से लेकर आम जनता तक सभी को चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से ब्राह्मण समाज को एकजुट करने के मिशन पर काम कर रहे थे, जिसकी भनक स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियों को समय रहते नहीं लग सकी।
सूत्रों के अनुसार, बरेली में तैनाती के दौरान ही अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मण समाज के उत्थान को लेकर सक्रियता बढ़ा दी थी। हैरानी की बात यह रही कि सिटी मजिस्ट्रेट जैसे संवेदनशील पद पर रहते हुए वे अपने कार्यालय में ही समाज से जुड़े नेताओं और युवाओं के साथ नियमित बैठकें करते थे। इन बैठकों में समाज की मजबूती, संगठन विस्तार और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा होती थी। प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कई अन्य ब्राह्मण अधिकारी उनके लगातार संपर्क में थे।
समाज को डिजिटल माध्यम से जोड़ने के लिए उन्होंने कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। हाल ही में मालवीय जयंती पर जीआईसी ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के बाद समाज में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और उन्हें एक अलग पहचान मिलने लगी। इस कार्यक्रम के बाद उनकी गतिविधियां और ज्यादा चर्चा में आ गईं।
बताया जा रहा है कि इस्तीफे का फैसला अचानक नहीं लिया गया था। सूत्रों के मुताबिक, अग्निहोत्री ने करीब पांच महीने पहले ही अपने करीबी लोगों के बीच पद छोड़ने की इच्छा जता दी थी। दिसंबर में भी इस पर विचार-विमर्श हुआ, लेकिन अंततः उन्होंने 26 जनवरी को अपना त्यागपत्र सौंपने का निर्णय लिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की खुफिया व्यवस्था, खासकर स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू), की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मजिस्ट्रेट स्तर का अधिकारी अपने कार्यालय का उपयोग सामाजिक बैठकों के लिए करता रहा और इसकी जानकारी खुफिया तंत्र को नहीं हुई, इसे बड़ी चूक माना जा रहा है। शासन स्तर पर अब इस संभावित इंटेलिजेंस फेल्योर की समीक्षा की जा रही है और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में आरक्षण और यूजीसी के नए नियमों को लेकर बहस तेज है। डैमेज कंट्रोल की कमी और समय पर खुफिया इनपुट न मिल पाने से सरकार के लिए भी स्थिति असहज होती दिख रही है।
