नई दिल्ली। हरियाणा में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जहां कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला शाखा में 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी पाई गई है। यह मामला तब सामने आया जब पंचकुला नगर निगम ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की जांच की। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब एक महीने पहले ही आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला सामने आया था।


रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम ने बैंक की सेक्टर-11 शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) के रूप में पैसे जमा किए थे। मामला तब उजागर हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपए की एफडी मैच्योर होने पर उसे अपने खाते में ट्रांसफर करने को कहा। शुरुआत में बैंक रिकॉर्ड में दिखाया गया कि पैसा ट्रांसफर हो गया है, लेकिन असल में यह रकम निगम के खाते में पहुंची ही नहीं। जब मामले की गहराई से जांच की गई तो पता चला कि बैंक स्टेटमेंट ही फर्जी था और पैसा कथित तौर पर फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था। अधिकारियों ने आगे जांच में पाया कि इस मामले से जुड़े सभी फिक्स्ड डिपॉजिट भी फर्जी थे और खातों में असल में कोई पैसा मौजूद नहीं था।


इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है और नगर निगम के संपर्क करने के बाद सभी खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट का विस्तृत मिलान शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, कुल गड़बड़ी 150 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है और जांच आगे बढ़ने के साथ और भी जानकारी सामने आ सकती है। इससे पहले, पिछले महीने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने भी अपनी चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपए के घोटाले की जानकारी दी थी। 22 फरवरी को एक एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने कहा था कि दोषी कर्मचारियों और अन्य बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस मामले के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से हटा दिया।