अव्यवस्थाओं का शिकार है बिजावर डिग्री कॉलेज, डिप्लोमा कोर्स और स्टाफ की कमी...!

Advertisement
बिजावर। क्षेत्र का शासकीय महाविद्यालय इन दिनों बदहाली और अव्यवस्थाओं के दौर से गुजर रहा है। हालात यह हैं कि बुनियादी सुविधाओं और प्राध्यापकों की कमी के चलते यहाँ छात्र-छात्राओं की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। विज्ञान संकाय शुरू होने के बाद भी अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है, वहीं कॉलेज की खेल गतिविधियां भी पूरी तरह ठप पड़ी हैं।
निजी कॉलेजों में प्रवेश को मजबूर छात्र स्थानीय स्तर पर अन्य सरकारी विकल्प न होने और कम फीस के बावजूद छात्र बेहतर भविष्य के लिए बिजावर के बाहर या निजी कॉलेजों में प्रवेश लेने को मजबूर हैं। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि यहाँ पारंपरिक विषयों के अलावा व्यवसायिक कोर्स, बीकॉम और डिप्लोमा कोर्स की लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 से 2011 के बीच जनभागीदारी समिति के माध्यम से यहाँ डीसीए और पीजीडीसीए जैसे कोर्स शुरू हुए थे, तब छात्रों की संख्या 600 के पार पहुँच गई थी।
विज्ञान संकाय का बुरा हाल, लैब और स्टाफ की कमी सत्र 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, कला संकाय में कुल 446 विद्यार्थी हैं, जबकि तीन वर्ष पहले शुरू हुए विज्ञान संकाय के प्रति छात्रों का मोहभंग हो रहा है। इस साल विज्ञान प्रथम वर्ष में मात्र 19 छात्रों ने दाखिला लिया है। कॉलेज में भौतिकी (फिजिक्स) के प्राध्यापक का पद रिक्त है। यहाँ पदस्थ प्राध्यापक का अगस्त में स्थानांतरण होने के बाद से अब तक न तो किसी की नियुक्ति हुई और न ही अतिथि विद्वान रखे गए। लैब में भी प्रैक्टिकल के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
केवल तीन स्थायी प्राध्यापक के भरोसे कॉलेज 39 साल पहले (29 सितंबर 1987) स्थापित हुए इस महाविद्यालय में वर्तमान में केवल तीन स्थायी प्राध्यापक (हिंदी, अंग्रेजी और इतिहास) ही पदस्थ हैं। शेष व्यवस्था 9 अतिथि विद्वानों और जनभागीदारी समिति के कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। नयाताल रोड पर स्थित कॉलेज भवन तक पहुँचने वाले मार्ग पर आवाजाही कम होने से छात्राएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं, हालांकि अब वहां अन्य सरकारी निर्माण होने से भविष्य में सुधार की उम्मीद है।
प्रभारी प्राचार्य का पक्ष इस संबंध में प्रभारी प्राचार्य आर.आर. परते का कहना है कि रिक्त पदों की जानकारी विभाग को पत्राचार के माध्यम से दे दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आगामी समय में पीजी (स्नातकोत्तर) कक्षाओं की मान्यता मिलने से विद्यार्थियों की संख्या में पुनः बढ़ोतरी होगी।
