श्योपुर। श्योपुर जिले में चर्चित बाढ़ राहत घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पूर्व तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को गिरफ्तार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्हें ग्वालियर स्थित उनके निवास से पकड़ा गया और कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। यह मामला साल 2021 में आई बाढ़ के बाद राहत राशि वितरण से जुड़ा है। आरोप है कि बड़ौदा तहसील में करीब 2.57 करोड़ रुपये की राशि 127 फर्जी खातों में ट्रांसफर की गई। इस घोटाले में तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, करीब 25 पटवारियों और 100 से अधिक बिचौलियों की मिलीभगत सामने आई है। डिप्टी कलेक्टर की ऑडिट में यह गड़बड़ी उजागर हुई थी, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।


पुलिस के अनुसार, राहत राशि वितरण के दौरान रिश्तेदारों और परिचितों को फर्जी तरीके से बाढ़ पीड़ित दिखाकर उनके खातों में पैसा डलवाया गया। इस मामले में Indian Penal Code की धारा 420, 467, 468, 409 और 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए अमिता सिंह तोमर ने पहले हाई कोर्ट और फिर Supreme Court of India में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन दोनों जगह से राहत नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।


श्योपुर एसपी सुधीर कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस घोटाले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है। गौरतलब है कि अमिता सिंह तोमर साल 2011 में कौन बनेगा करोड़पति के पांचवें सीजन में 50 लाख रुपये जीतकर सुर्खियों में आई थीं। इसके बाद वे प्रशासनिक सेवा में रहते हुए कई बार विवादों में भी रही हैं।