सतना। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले की गई वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Election Commission of India की समीक्षा में खुलासा हुआ है कि प्रदेश की करीब 60 विधानसभाओं में नाबालिगों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो गए हैं। नियमों के मुताबिक, वोटर बनने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए, लेकिन इसके बावजूद लगभग 130 ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनकी उम्र इससे कम है।
सतना जिले की सतना विधानसभा में तो स्थिति और चौंकाने वाली है, जहां 13-13 साल के बच्चों को भी मतदाता बना दिया गया। इनमें शनि (चौक बाजार), सैयद सज्जाद अली (उमरी) और रामनिहोरे (अमौधाकला) जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी के बाकायदा वोटर आईडी नंबर भी जारी कर दिए गए हैं, जिससे बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यह गड़बड़ी केवल सतना तक सीमित नहीं है। ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड-विंध्य, महाकौशल और मालवा-भोपाल क्षेत्र की कई सीटों—जैसे मुरैना, भिंड, सागर, पन्ना, जबलपुर, नरेला, हुजूर और उज्जैन दक्षिण—में भी नाबालिग मतदाताओं के नाम पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि राज्यभर में मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया में बड़ी चूक हुई है।
दरअसल, चुनाव से पहले Special Intensive Revision (SIR) अभियान के तहत तीन महीने तक घर-घर जाकर सत्यापन किया गया था। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में नाबालिगों का नाम जुड़ना इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल खड़ा करता है। चुनाव आयोग ने अब इस गड़बड़ी को सुधारने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित मतदाताओं से संपर्क कर Form 8 के जरिए नाम हटाने या सुधारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

