हेलसिंकी। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम के केंद्र में 50 हजार से अधिक लोगों ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सरकार से और मजबूत कदम उठाने की मांग को लेकर मार्च किया। यह प्रदर्शन स्वीडन में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से लगभग तीन सप्ताह पहले आयोजित किया गया।

स्वीडिश मीडिया के अनुसार, रविवार को हुए इस प्रदर्शन में करीब 280 संगठनों ने हिस्सा लिया। इनमें पर्यावरण और मानवाधिकार समूह, मजदूर यूनियनें, धार्मिक संगठन, शोधकर्ता तथा सांस्कृतिक समूह शामिल थे।

स्वीडिश सोसाइटी फॉर नेचर कंजर्वेशन की अध्यक्ष और इस प्रदर्शन की प्रमुख आयोजकों में से एक बीट्रिस रिंडेवाल ने स्वीडिश मीडिया से कहा कि नीति निर्माताओं को जलवायु संकट को गंभीरता से लेना चाहिए।

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब अगले महीने होने वाले आम चुनाव से पहले जलवायु परिवर्तन का मुद्दा मतदाताओं के लिए पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण बन गया है। वहीं, इस विषय पर लोगों की राय राजनीतिक विचारधाराओं के आधार पर और अधिक बंटी हुई दिखाई दे रही है।

गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय के स्वतंत्र शोध संस्थान एसओएम इंस्टीट्यूट के ताजा राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, खुद को राजनीतिक रूप से वामपंथी मानने वाले लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे जलवायु परिवर्तन को लेकर बहुत चिंतित हैं। वहीं, दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत से भी कम रहा।

स्वीडन की सर्वे एजेंसी नोवस की ओर से जून में किए गए एक अन्य सर्वेक्षण में जलवायु परिवर्तन मतदाताओं के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों की सूची में छठे स्थान पर रहा। जनवरी में यह मुद्दा नौवें स्थान पर था।

गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर मार्टिन हुल्टमैन ने स्वीडिश अखबार डागेन्स न्येहेटर से कहा कि स्वीडन में जलवायु मुद्दे को लेकर लोगों की भागीदारी और दिलचस्पी की एक नई लहर देखने को मिल रही है।

उन्होंने कहा कि पिछली लहर कोविड-19 महामारी के दौरान कमजोर पड़ गई थी। इसके पीछे जीवाश्म ईंधन उद्योग की लॉबिंग, गलत जानकारी का फैलना और दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी ताकतों की चुनावी सफलता जैसे कारण थे। उनके अनुसार, जलवायु परिवर्तन को लेकर लोगों की बढ़ती चिंता की एक वजह यह भी हो सकती है कि वे अब इसके प्रभावों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अधिक सीधे तौर पर महसूस कर रहे हैं।

स्वीडन में 13 सितंबर को देश की संसद रिक्सडाग के साथ-साथ क्षेत्रीय और नगर परिषदों के लिए भी चुनाव होंगे।