कच्चे जूट की बढ़ती कीमतों पर आजेएमए ने की सरकार से हस्तक्षेप की मांग

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इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (आईजेएमए) ने केंद्र सरकार से कच्चे जूट की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और फाइबर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने जूट आयुक्त अमृत राज को लिखे पत्र में कहा कि मिलों के पास कच्चे जूट की आपूर्ति में गंभीर कमी आ गई है। दिसंबर 2025 में भंडार में लगभग 1.25 लाख गांठों की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, दक्षिण बंगाल के टीडीएन-3 ग्रेड जूट की कीमतें 13,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। आईजेएमए का कहना है कि इस आपूर्ति संकट और कीमतों में तेजी के कारण कई जूट मिलें उत्पादन बंद करने या इसे घटाने पर मजबूर हुई हैं। इसके परिणामस्वरूप लगभग 75,000 श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं। मिलों की यह स्थिति उद्योग की स्थिरता और जूट उत्पादक क्षेत्र के रोजगार पर गंभीर असर डाल रही है। कीमतों में वृद्धि को रोकने और जूट फाइबर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आईजेएमए ने सुझाव दिया है कि व्यापारियों, डीलरों, स्टॉकिस्टों और एजेंसियों को अपने कच्चे जूट के भंडार को 31 मार्च तक बेचने की अनुमति दी जाए। इसके बाद निजी स्तर पर किसी भी प्रकार का जूट व्यापार अवैध माना जाएगा। एसोसिएशन का मानना है कि इससे मिलों को आवश्यक कच्चा माल मिलेगा और श्रमिकों की रोज़गार सुरक्षा बनी रहेगी।
