Saturday, January 10, 2026

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शक्सगाम घाटी पर विदेशी निर्माण स्वीकार नहीं करेंगे

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10 जनवरी 2026, 08:53 am IST
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चीन और पाकिस्तान द्वारा महत्वाकांक्षी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के दूसरे चरण के विस्तार की घोषणा के बाद भारत ने इस पर अत्यंत तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रस्तावित विस्तार के तहत पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शक्सगाम घाटी को शामिल किए जाने को भारत सरकार ने अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और शक्सगाम घाटी पर किसी भी प्रकार का विदेशी निर्माण स्वीकार्य नहीं है।


भारत का विरोध मुख्य रूप से 1963 के उस तथाकथित बाउंड्री एग्रीमेंट पर आधारित है, जिसके तहत पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा की गई 5,180 वर्ग किलोमीटर की शक्सगाम घाटी चीन को सौंप दी थी। विदेश मंत्रालय ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में दोहराया कि भारत ने कभी भी इस अवैध समझौते को मान्यता नहीं दी है। प्रवक्ता ने कहा कि सीपीईसी का कोई भी हिस्सा, जो भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, वह पूरी तरह से अवैध और अमान्य है। भारत ने चीन के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया है कि वह शक्सगाम घाटी में जमीनी हकीकत बदलने की किसी भी कोशिश के खिलाफ अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।


रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, सीपीईसी 2.0 के तहत शक्सगाम की ओर बढ़ती गतिविधियां भारत की उत्तरी सीमाओं के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा कर रही हैं। भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान विशेष रूप से यारकंद-आघिल-शक्सगाम सड़क निर्माण पर नजर रखे हुए है। सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण से पता चला है कि चीन ने अपने जी-219 हाईवे से एक नई सड़क निकाली है जो सियाचिन ग्लेशियर के उत्तरी छोर पर स्थित इंदिरा कॉल से मात्र 50 किलोमीटर की दूरी पर समाप्त होती है। यह क्षेत्र 1984 से भारत के पूर्ण नियंत्रण में है, और यहाँ चीनी उपस्थिति सियाचिन और लद्दाख की सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकती है। भारत ने न केवल अपनी सीमाओं पर निर्माण को लेकर चिंता जताई, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर भी टिप्पणी की। विदेश मंत्रालय ने ताइवान के पास चीनी सैन्य अभ्यासों पर सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह करते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर बल दिया। भारत सरकार का संदेश स्पष्ट है कि आर्थिक गलियारे के नाम पर संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में शक्सगाम और पीओके के इस विवादित विस्तार को लेकर भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में कूटनीतिक तल्खी और बढ़ने के आसार हैं।

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