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मार्को रुबियो को राष्ट्रपति बनाने के दिए संकेत

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12 जनवरी 2026, 11:27 am IST
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वेनेजुएला में हालिया सैन्य कार्रवाई और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर और भी आक्रामक हो गए हैं। अब उनके निशाने पर कैरेबियाई देश क्यूबा है। ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी प्रतिक्रिया दी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा का राष्ट्रपति बनाने के सुझाव पर साउंड्स गुड टू मी (मुझे यह ठीक लगता है) कहकर अपनी सहमति जताई है।


यह बयान महज एक मजाक नहीं, बल्कि लैटिन अमेरिका के प्रति ट्रंप की बदलती और सख्त नीति का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। मार्को रुबियो स्वयं क्यूबा मूल के हैं और लंबे समय से वहां की कम्युनिस्ट सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं। ट्रंप ने हवाना प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि वेनेजुएला से मिलने वाली आर्थिक और ऊर्जा मदद अब पूरी तरह बंद हो चुकी है, इसलिए इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्यूबा को अमेरिका के साथ समझौता कर लेना चाहिए। ट्रंप का दावा है कि क्यूबा वर्षों से वेनेजुएला के नेताओं को सुरक्षा सेवाएं देने के बदले में भारी मात्रा में तेल और धन वसूल रहा था। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, अब और नहीं! अब क्यूबा को वेनेजुएला से शून्य तेल और पैसा मिलेगा। ट्रंप ने आगे कहा कि वेनेजुएला को अब क्यूबा के ठगों की सुरक्षा की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब वहां अमेरिकी सेना की सुरक्षा मौजूद है।


इस आक्रामक रुख पर क्यूबा ने भी तीखा पलटवार किया है। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने ट्रंप के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके देश ने कभी सुरक्षा के बदले पैसा नहीं लिया। उन्होंने अमेरिका पर एक अपराधी की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह वैश्विक शांति के लिए खतरा है। क्यूबा ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी अमेरिकी सैन्य जबरदस्ती या प्रतिबंध के आगे नहीं झुकेगा और उसे अपने व्यापारिक निर्णय लेने का संप्रभु अधिकार है।


ट्रंप की यह आक्रामकता केवल क्यूबा तक सीमित नहीं है। पिछले दिनों उन्होंने कोलंबिया को लेकर भी तल्ख टिप्पणी की थी, जिसे कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने अमेरिकी आक्रामकता करार दिया है। पेट्रो ने लैटिन अमेरिकी देशों से एकजुट होने की अपील की है ताकि वे विदेशी ताकतों के नौकर न बनें। फिलहाल, ट्रंप के इन बयानों ने पूरे लैटिन अमेरिका में एक नए सैन्य और कूटनीतिक टकराव की आशंका पैदा कर दी है।

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