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व्यापार समाचार28 साल की चालाक चार्ली ने लगाया अमेरिका के सबसे बैंक जेपी मॉर्गन चेस को 1400 करोड़ का चूना

28 साल की चालाक चार्ली ने लगाया अमेरिका के सबसे बैंक जेपी मॉर्गन चेस को 1400 करोड़ का चूना

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9 जनवरी 2026, 09:45 am IST
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साल 2021 में न्यूयॉर्क की ऊंची इमारतों के बीच एक ऐसी डील आकार ले रही थी, जिसकी गूंज वैश्विक कारोबारी जगत में सुनाई देने वाली थी। एक ओर थीं महज 28 साल की स्टार्टअप फाउंडर चार्ली जेविस, जिनके चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास दिखाता था, और दूसरी ओर दुनिया के सबसे बड़े बैंकों में शुमार जेपी मॉर्गन चेस के अनुभवी अधिकारी मौजूद थे। टेबल पर 175 मिलियन डॉलर, यानी करीब 1400 करोड़ रुपये की डील रखी थी। जहां चार्ली का दावा था कि उनका स्टार्टअप लाखों छात्रों की जिंदगी बदल रहा है। बैंक के शीर्ष अधिकारियों को लगा कि उन्हें एक असाधारण मौका मिल गया है, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह सौदा इतिहास की सबसे चौंकाने वाली धोखाधड़ी साबित होगा।


दरअसल चार्ली जेविस का जीवन शुरू से ही सुविधाओं से भरा रहा। न्यूयॉर्क के समृद्ध इलाके में पली-बढ़ी चार्ली के पिता हेज फंड से जुड़े थे। चार्ली प्रतिष्ठित व्हार्टन स्कूल से पढ़ाई की और कम उम्र में ही कुछ बड़ा करने का सपना देखने लगी। कॉलेज के बाद उसने छात्रों की मदद के उद्देश्य से ‘फ्रैंक’ नामक स्टार्टअप शुरू किया, जो कॉलेज फीस और सरकारी सहायता की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाने का दावा करता था। मीडिया में चार्ली को छात्रों की मसीहा के रूप में दिखाया गया और फोर्ब्स ने इस स्टार्टअप को ‘30 अंडर 30’ सूची में भी शामिल किया।


हालांकि चमक-दमक के पीछे कहानी कुछ ओर थी। इसी बीच जेपी मॉर्गन युवाओं को अपने बैंकिंग नेटवर्क से जोड़ने के लिए नए प्लेटफॉर्म की तलाश में था। चार्ली ने मौके का फायदा उठाकर बैंक को प्रस्ताव दिया कि वह अपना स्टार्टअप बेचना चाहती है। जब बैंक ने यूजर बेस पूछा, तब चार्ली ने बिना झिझक दावा कर दिया कि उसके पास 42 लाख से अधिक छात्र यूजर हैं।


मॉर्गन ने इन दावों के सबूत मांगे। असलियत यह थी कि फ्रैंक के पास करीब तीन लाख वास्तविक यूजर ही थे। बाकी आंकड़े गढ़ने के लिए चार्ली ने एक डेटा साइंस प्रोफेसर की मदद ली, जिससे लाखों फर्जी नाम, ईमेल और जन्मतिथियां तैयार की। यही फर्जी डेटा बैंक के सामने पेश किया गया। शुरुआती जांच में सब कुछ वास्तविक लगने पर बैंक ने फ्रैंक को 175 मिलियन डॉलर में खरीद कर चार्ली को बैंक में ऊंचा पद और भारी बोनस भी दिया। लेकिन कुछ महीनों बाद सच्चाई सामने आने लगी। बैंक की मार्केटिंग टीम ने जब लाखों छात्रों को ईमेल भेजे, तब ज्यादातर मेल बाउंस हो गए। जांच में खुलासा हुआ कि करीब 90 प्रतिशत अकाउंट फर्जी थे। इसके बाद जेपी मॉर्गन ने चार्ली को नौकरी से निकाल कर धोखाधड़ी का मुकदमा दायर कर दिया।

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