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झांसी : पोस्टमार्टम हाउस में रखे शव की आंखें व कान गायब, मामले की जांच शुरू

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झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का पोस्टमार्टम हाउस अपने कार्यशैली के चलते अक्सर विवादों में रहता है। बीते रोज शनिवार काे पोस्टमार्टम हाउस में रखे महिला के शव के चूहे या कीड़े कान और आंख खा गए। शव पर कॉकरोच रेंगते मिले। परिजन जब पोस्टमॉर्टम के बाद शव लेने पहुंचे, तब वे लाश की हालत देखकर दंग रह गए। उन्होंने जमकर हंगामा किया और लापरवाही का आरोप लगाया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने रविवार काे मामले की चार सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच शुरू करा दी है।
गुरसराय के सिरबो गांव की रहने वाली क्रांति देवी (26) की शादी लगभग 8 साल पहले टीकमगढ़ के सतवारा गांव निवासी प्रीतम पटेल से हुई थी। पति शराब पीकर झगड़ा करता था। इस वजह से महिला क्रांति ससुराल छोड़कर मायके आ गई थी। 28 नवंबर को परिजन खेत पर गए थे और घर पर क्रांति व उसकी भाभी थी। इस दौरान क्रांति ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे गुरसराय सीएचसी ले गए, जहां से झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल काॅलेज में इलाज के दौरान शुक्रवार को क्रांति की मौत हो गई। पुलिस ने मृतका के शव काे कब्जे में लेकर पाेस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
महिला के भाई सक्षम पटेल ने आरोप लगाया कि 'मॉर्च्यूरी में शव रखने के लिए उनसे 400 रुपये लिए गए थे। हमारे सामने जब शव को फ्रीजर में रखा गया तब कंडीशन ठीक थी। अगले दिन 29 नवंबर काे जब डेडबॉडी लेने पहुंचे तो कान और आंख गायब थे। जिस तरह से शव को कुतर गया था, उससे पता चल रहा था कि चूहे और कॉकरोच ने शव का यह हाल किया है। उन्होंने साफ तौर पर इसे मॉर्च्यूरी के स्टाफ की लापरवाही बताया। भाई ने सीएमएस से शिकायत करते हुए मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
मेडिकल काॅलेज के सीएमएस डॉ.सचिन माहौर ने रविवार काे बताया कि महिला के शव को फ्रीजर में रखा गया था। जब फ्रीजर से बाहर निकाला गया तो आंख की पुतली पर कटे के निशान थे। फ्रीजर में किसी भी जानवर की घुसने की गुंजाइश नहीं है। हो सकता है कि कॉकरोच या छोटे कीड़े की वजह से ऐसा हुआ होगा। चार सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच कराई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व में भी कई बार मेडिकल काॅलेज की मॉर्च्यूरी में इस तरह की लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं लेकिन प्रबंधन इनसे सीख नहीं ली। परिणाम स्वरूप ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती रहती है।
